यह 80 वर्ष मेरी आयु नहीं, गुरु मिश्री की आशीष है – प्रवर्तक सुकन मुनि
भामाशाह व लाभार्थियों का ट्रस्ट ने किया भव्य बहुमान
ब्यावर सहित देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालु,श्रद्धा से गुरु मिश्री को नवाया शीश
सोजत सिटी राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 2 जनवरी:
मरुधरा की पावन धरा सोजत सिटी स्थित मरुधर केसरी अस्थि कलश धाम आज आस्था, समर्पण, दानवीरता के अनूठे संगम का साक्षी बना। अवसर था श्रमण संघीय भीष्म पितामह मरुधर केसरी श्री मिश्रीमल जी म.सा. की 42वीं पुण्य स्मृति व वरिष्ठ प्रवर्तक सुकन मुनि म.सा. के 80 वें जन्मोत्सव समारोह का।
समारोह में ब्यावर समेत देश भर से आए हजारों श्रद्धालुओं, राजनीतिक हस्तियों,भामाशाहों,संत वृन्द की गरिमामय साक्षी में वातावरण “जब तक सूरज चांद रहेगा, मरुधर केसरी का नाम रहेगा” के जयकारों से गूंज उठा। समारोह का भव्य आगाज श्री मरुधर केसरी अस्थि कलश धाम पर ध्वजारोहण एवं मरुधर केसरी दरबार के उद्घाटन के साथ,नवकार महामंत्र के मंगलाचरण से शुभारंभ हुआ।
हुए भावपूर्ण प्रवचन भक्तों ने लगाई गहरी डुबकियां
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य संतों ने मरुधर केसरी के गुणों का पुण्य स्मरण करते हुए भावपूर्ण बखान किया। प्रवर्तक श्री व उपप्रवर्तक श्री के उद्बोधन ने सभी की आँखों को नम कर दिया।
प्रवर्तक गुरु मिश्री का स्मरण करते हुए भाव विभोर
प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने कहा कि “मैं तो शून्य हूँ, जो कुछ है वह गुरु का है” अपने 80वें जन्मोत्सव पर मिल रही बधाइयों को विनम्रतापूर्वक अपने गुरु मरुधर केसरी के चरणों में समर्पित करते हुए वरिष्ठ प्रवर्तक श्री सुकन मुनि जी भावविभोर हो गए।
उन्होंने फर्माया: आप आज मेरा 80वां जन्मोत्सव मना रहे हैं,लेकिन सत्य तो यह है कि यह देह और यह साँसें मेरी नहीं हैं। यह तो मेरे आराध्य गुरुदेव मरुधर केसरी की दी हुई भिक्षा है। मैं तो उस महासूर्य (गुरु मिश्री) की एक छोटी सी किरण मात्र हूँ। मेरे जीवन का एक-एक पल संघ और समाज की सेवा के लिए है,यही गुरु दक्षिणा है।
80 वर्ष की यह यात्रा मेरी उपलब्धि नहीं, बल्कि गुरुदेव की कृपा का प्रमाण है। आज के दिन मुझे नमन मत करो, नमन उस शक्तिपुंज गुरु मिश्री को करो, जिन्होंने मुझ जैसे साधारण पत्थर को तराश कर इस योग्य बनाया। मेरा जन्मदिन तो केवल एक बहाना है,असली मकसद तो गुरुदेव के उपकारों को याद करना है।
“भक्तों के भगवान है मरुधर केसरी” – उपप्रवर्तक अमृत मुनि
उप प्रवर्तक तपस्वी रत्न अमृत मुनि जी ने गुरु मरुधर केसरी की महिमा गाते हुए प्रवर्तक श्री के जन्मोत्सव पर भाव व्यक्त किए: उन्होंने कहा कि “मरुधर केसरी श्री मिश्रीमल जी म.सा. त्याग व तपस्या के हिमालय थे। उनके पट्ट परंपरा को हमारे श्रद्धेय प्रवर्तक गुरुदेव सुकन मुनि सा ने अपने वात्सल्य से भरा है। गुरुवर सुकन मुनि के 80वें जन्मोत्सव पर हम यही मंगलकामना करते हैं कि आप दीर्घायु हों और स्वस्थ रहें। जैसे मिश्री मीठी होती है, वैसे ही आपका स्वभाव सरल और शांत है।
आप में हमें गुरु मरुधर केसरी की छवि दिखाई देती है।आपका साया इस संघ पर वटवृक्ष की भांति हमेशा बना रहे, ताकि हम आपकी छत्रछाया में गुरु मिश्री के बताए मार्ग पर चलते रहें। मरुधर केसरी केवल एक संत नहीं थे, वे ‘आशुकवि’ और ‘दिव्य विभूति’ थे। राजस्थानी भाषा में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य रचकर उन्होंने धर्म को जन-जन की भाषा में पिरोया। उनकी कलम में मां सरस्वती का वास था और वाणी में साक्षात तीर्थंकरों का संदेश।
उन्होंने हमें सिखाया कि धर्म केवल माला फेरने में नहीं, बल्कि किसी के आंसू पोंछने में है।

गौशालाओं का निर्माण हो या शिक्षा का प्रचार, गुरुदेव ने समाज को नई दिशा दी। आज उनकी 42वीं पुण्यतिथि पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके बताए सेवा और साहित्य के मार्ग को कभी धूमिल नहीं होने देंगे। उनका आशीर्वाद ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।”
भामाशाहों का भव्य अभिनंदन
समारोह के दौरान उदारमना भामाशाहों का ट्रस्ट मंडल द्वारा शॉल, साफा, माला और स्मृति चिन्ह भेंट कर बहुमान किया गया।
समारोह के मुख्य लाभार्थी चंद्रप्रकाश तालेड़ा,राजेश तालेड़ा, जवरीलाल कटारिया, हुकमीचंद संचेती, नरेश बोहरा, मीठालाल पगारिया, महावीर चंद कटारिया, विनोद बोहरा,रतन मुथा, सुरेश लुणावत,पारसमल धोका परिवार, निर्मल गेलड़ा, पिंटू लोढ़ा, नवरत्न मल सांखला, मंगलचंद मुणोत, नवरत्न मल गुंदेचा आदि का विशेष अभिनंदन किया गया जिन्होंने इस भव्य आयोजन में मुख्य लाभार्थी के रूप में महती भूमिका निभाई। इसके साथ पावन धाम में विकास कार्यों में सहयोग देने वाले, कक्ष नवीनीकरण के लाभार्थियों का भी सम्मान किया गया।
जिनमें प्रमुख रूप से मंगलचंद, प्रकाशचंद्र मुणोत बैंगलोर, महावीरचंद धारीवाल बैंगलोर, राजेशचंद मीठालाल गुलेच्छा बैंगलोर,जैन स्थानक के पुनरुद्धारक सुकनराज, सज्जन राज गुगलिया परिवार सुमेरपुर का ट्रस्ट के अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश तालेड़ा,सचिव राजेश कुमार तालेड़ा, कोषाध्यक्ष अनिल संचेती, केवलचन्द धोका,कैलाश अखावत,भीकमचंद लुंकड़, सुरेश लुणावत,नरेश बोहरा, प्रसन्नराज सिंघवी, सहसचिव एम. विकास धोका, दिनेश भलगट, संगठन सचिव मंगलचंद मुणोत, प्रचार-प्रसार सचिव प्रवीण बोहरा, ललित कुमार पगारिया, सुरेश बलाई, पदमचंद धोका, राजेश कोरीमुथा, शांतिलाल सुराणा, विनोद लोढ़ा, जयंती भंडारी, पिंटू लोढ़ा, नवरत्न मल गुंदेचा ने सभी दानदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपके सहयोग से ही पावन धाम विकास के पथ पर अग्रसर है। मंच का कुशल एवं प्रभावी संचालन डॉ. वरुण मुनि म.सा. ने किया। अंत में महामंगल पाठ एवं गौतम प्रसादी के साथ समारोह का समापन हुआ।

इन संतो एवम साध्वियों की रही पावन निश्रा
समारोह के सान्निध्य प्रदाता प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ,उपप्रवर्तक अमृत मुनि महाराज के साथ युवा प्रणेता महेश मुनि, उप प्रवर्तक सन्मति मुनि, बालयोगी अखिलेश मुनि, सेवाभावी संदेश मुनि, डॉक्टर वरुण मुनि एवं कथन मुनि सहित विशाल संत वृन्द उपस्थित रहे। साथ ही समारोह में साध्वी राजमती, साध्वी प्रफुल्ला कंवर, साध्वी प्रीति सुधा, साध्वी कमल प्रभा और साध्वी प्रतीक प्रभा आदि ने भी अपने श्रद्धासिक्त विचारों से गुरु मिश्री सुकन को नमन किया।

राजनीतिक,सामाजिक दिग्गजों ने नवाया शीश
समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए राजनीतिक सामाजिक जगत की प्रमुख हस्तियां विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद श्री मदन राठौड़, विशिष्ट अतिथि पाली सांसद पी.पी. चौधरी, सोजत विधायक श्रीमती शोभा चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण दवे, सोजत नगर परिषद चेयरमेन श्रीमती मंजू-जुगलकिशोर निकुम, फिल्म निर्माता के सी बोकाड़िया, उपासक विद्याप्रकाश पडियार,देश के ख्यातनाम भामाशाह सुनील खेतपालिया एवं दीपचंद लूनिया ने गुरु चरणों में वंदन किया और प्रवर्तक श्री उपप्रवर्तक श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।

देश भर के ट्रस्टों और संस्थानों का रहा जमावड़ा
समारोह को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करते हुए देश के विभिन्न कोनों से मरुधर केसरी संस्थानों के शीर्ष पदाधिकारी उपस्थित रहे।
स्थानीय आयोजन समिति के अलावा श्री मरुधर केसरी पावन धाम जैतारण, श्री मरुधर केसरी गुरु सेवा समिति हैदराबाद, चेन्नई (मद्रास) और बैंगलोर (कर्नाटक), मरुधर केसरी पारमार्थिक संस्थान पुष्कर, ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाई, इसके अतिरिक्त सिकन्दराबाद, जयपुर, पुष्कर, जोधपुर, पाली और ब्यावर स्थित विभिन्न गुरु मरुधर केसरी मित्र मंडलों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी समारोह में भाग लिया।


