जिस घर में रामचरितमानस का पाठ होता है ‎उस घर में लड़ाई नहीं होती – बृजेश्वरी देवी 

जिस घर में रामचरितमानस का पाठ होता है ‎उस घर में लड़ाई नहीं होती – बृजेश्वरी देवी 



‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 21 जनवरी।”जिस घर में रामचरितमानस का पाठ होता  है, उस घर में कभी लड़ाई नहीं होती। लड़ाई का मुख्य कारण दिमाग का अपसेट होना होता है। जब दिमाग सही नहीं होता तब लड़ाई  होती है। मनुष्य का सभी चीज सेट रहता है ,केवल दिमाग ही अपसेट रहता है।” उक्त उद्गार आज मानस कोकिला बृजेश्वरी देवी ने अनुपम नगर स्थित अनुपम वाटिका के अयोध्या धाम में प्रकट किये। 

‎ श्री राम कथा के तीसरे दिन मानस कोकिला बृजेश्वरी देवी ने कहा कि देवता बनना सहज है किंतु मनुष्य बनना उतना ही कठिन है । मानव जन्म लेते ही रोना पड़ता है। रोना भी एक कला है । बच्चे का रोना एक अलग महत्व रखता है । उन्होंने कहा कि किसी घर में जब बच्चा पैदा होता है तो वहां जो आनंद का माहौल होता है,वह काफी सुखद होता है । अयोध्या में भी चार-चार बच्चों ने  जन्म लिया तो फिर अयोध्या में कितना आनंद का माहौल होगा,इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राम महा विष्णु है और भरत विष्णु । उन्होंने अयोध्या में चारों बच्चों राम, भरत, शत्रुहन के नामकरण के बारे में विस्तार से बताया। 
‎ बृजेश्वरी देवी ने कहा कि इस दुनिया में दो ग्रंथ है एक महाभारत तो दूसरा रामचरितमानस । मोक्ष पाना है तो महाभारत का पाठ करो और यदि जीवन जीने की कला सीखनी है तो रामचरितमानस का पाठ करो । उन्होंने कहा कि रामायण तो कई हैं किंतु रामचरितमानस एक ही है । यह ग्रंथ लोगों को आसानी से समझ में आ सके, इस तरह लिखी गई है । उन्होंने कहा कि श्री राम आनंद के सागर हैं। रामचरितमानस से हम जीवन जीने की कला को आसानी से समझ सकते हैं । 
‎ कथा के तीसरे दिन आज के प्रसाद की व्यवस्था विश्व ब्राह्मण महिला मंडलऔरआदर्श महिला मंडल द्वारा की गई थी। प्रसाद व्यवस्था में सहयोग आदर्श महिला मंडल की श्रीमत�

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