महान संतों के गुणों को अंगीकार कर जीवन बना सकते सार्थक- मुकेश मुनिजी… मन की चंचलता को नियंत्रित एवं स्थिर करने का माध्यम स्वाध्याय- हरीश मुनिजी

महान संतों के गुणों को अंगीकार कर जीवन बना सकते सार्थक- मुकेश मुनिजी… मन की चंचलता को नियंत्रित एवं स्थिर करने का माध्यम स्वाध्याय- हरीश मुनिजी

हुबली कर्नाटक (अमर छत्तीसगढ) ,1 फरवरी। पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ कचंगार गल्ली,हुबली के तत्वावधान में रविवार को उपाध्याय प्रवर कन्हैयालालजी म.सा. के सुशिष्य आगम पिपासु सेवाभावी उप प्रवर्तक विनय मुनि ‘‘वागिश’’ का दीक्षा दिवस सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया।

धर्मसभा में मुकेशमुनिजी म.सा. ने पूज्य विनय मुनि ‘‘वागिश’’ के प्रति संत मण्डल की तरफ से हार्दिक मंगलभावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वह जिनशासन की सेवा करके अपने गुरू पूज्य उपाध्याय प्रवर कन्हैयालालजी म.सा. का नाम रोशन कर रहे है ओर उनकी वाणी लोगों को धर्म पथ पर चलने के लिए प्रेरित कर रही है।

उन्होंने कहा कि महान संतो ंके आर्दशों एवं गुणों को जीवन में अंगीकार करने पर हमारी जिंदगी सार्थक हो सकती है। गुरू के बताए मार्ग पर चलकर भगवान की प्राप्ति भी हो सकती है।

धर्मसभा में सेवारत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. ने कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए मन की चंचलता पर नियंत्रण जरूरी है। मन चंचल होने से कई बार व्यक्ति पथ विचलित होकर अपने लक्ष्य से भटक जाता है। स्वाध्याय के माध्यम से हम मन को स्थिर बना सकते है।

उन्होंने कहा कि हम दूसरों के बारे में बहुत सोचते ओर चिंतन करते है ओर उनकी खामियां गिनाते है पर कभी स्व निंदा या आत्मालोचना नहीं करते है।

आत्मालोचना किए बिना हम अपने भीतर की सफाई नहीं कर सकते। जीवन सफल बाहरी सुंदरता से नहीं बल्कि आत्मा की सुंदरता से ही बनता है।

प्रज्ञारत्न श्री हितेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि जीवन में मोक्ष का दरवाजा खोलने की चाह है तो पाप के दरवाजे बंद करने ही होंगे। इसके लिए पापों की लिस्ट बना उसे कम करने में जुट जाओ। पूर्व उपार्जित पाप कर्मो का फल भोगना ही पड़ता है।

उन्हांेंने कहा कि मन, वचन व काया द्वारा मिलकर किए कुछ गलत पाप कर्म ऐसे होते है जो बिना भोगे तपस्या, त्याग, संयम किसी से खत्म नहीं हो सकते। इस जीवन में पूर्व उपार्जित पाप कर्म को समय रहते समाप्त कर दे।

धर्मसभा में प्रार्थनार्थी श्री सचिनमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में अतिथियों का स्वागत हुबली श्रीसंघ के अध्यक्ष उकचंदजी बाफना ने किया। संचालन महामंत्री प्रकाशजी कटारिया ने किया।

हुबली एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक श्राविका धर्मसभा में उपस्थित रहे। धर्मसभा के बाद अल्पाहार की व्यवस्था रखी गई। अल्पाहार के लाभार्थी श्रीमती पिस्ताबाई चंदनमल जी कटारिया परिवार राणावास -हुबली वाले रहे।

प्रस्तुतिः अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन, भीलवाड़ा

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