बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ) 7 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की फैक्ट्री और इंड्रस्ट्रियल यूनिट में मजदूरों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ पर सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट ने राज्य की औद्योगिक इकाइयों, विशेषकर कोयला आधारित पावर प्लांट, स्टील और स्पंज आयरन संयंत्रों में कार्यरत मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गहरी नाराजगी जताई है।
कोर्ट ने कहा कि कई उद्योगों में आज भी ओएचसी, योग्य डॉक्टर, एम्बुलेंस और नियमित मेडिकल जांच जैसे बुनियादी प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जनहित याचिका सहित अन्य मामलों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नरों ने विभिन्न उद्योगों का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट पेश की।
कोर्ट कमिश्नर अदिति सिंहवी ने बताया कि कुछ उद्योगों में दो बार अभियोजन के बावजूद हालात नहीं सुधरे हैं। कई जगह मेडिकल जांच निजी लैब से कराई जा रही है, जिनकी रिपोर्ट संदेहास्पद है. ओएचसी मानकों के अनुरूप नहीं, पूर्णकालिक योग्य डॉक्टर नियुक्त नहीं हैं।
एम्बुलेंस की लॉगबुक अपडेट नहीं है। श्रमिकों में सुनने की क्षमता की समस्या पाई गई, जबकि रिपोर्ट सामान्य बताई गई थी।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल दस्तावेज जमा कर देना पर्याप्त नहीं है। जिन उद्योगों ने पैरा-वाइज जवाब दाखिल नहीं किया है। उन्हें नया शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि, कोर्ट कमिश्नर दोबारा निरीक्षण कर रिपोर्ट दें। सुधार कार्यों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि की जाए. जिन उद्योगों में कमी पाई गई है, वहां और सुधार आवश्यक हैं।

