क्षमा ही धर्म है….क्षमा भीतर मे नही होगी तो वह क्रौध का पेड़ बढता जायेगा- श्री श्रुतप्रभ जी

क्षमा ही धर्म है….क्षमा भीतर मे नही होगी तो वह क्रौध का पेड़ बढता जायेगा- श्री श्रुतप्रभ जी

ब्यावर (अमर छत्तीसगढ़) 11 मार्च।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने समता भवन मे नियमित भगवान महावीर के प्रवचन की श्रृखंला से बताया भगवान महावीर लोगो की आत्मा का कल्याण करने के साथ उनके पर भव मे भी शांति चाहते थे उसके लिए उन्होंने दस धर्म बताये जिसमे पहला धर्म क्षमा का है।


म सा ने क्षमा पर बताया क्षमा अगर भीतर से नही होगी तो क्रौध का पेड बढता जायेगा,हमे ऐसा कर्म कभी नही करना चाहिए जिससे लोग हमारी हंसी उडाये। यश पाने के लिए किसी पर भी प्रभाव नही डाले दीक्षा ले लो लोग अपने आप झुकने को तैयार हो जायेंगे।


म सा ने कहा क्रौधी व्यक्ति मन मे ऐक बार सोच लिया उसको हटाना बहुत मुश्किल होता है, गलती होने पर अंतरदिल से क्षमा मांग लेनी चाहिए सामने वाला करे या नही करे, पुण्य आत्मा ही क्षमा कर देता है क्योंकि उनके अंदर उत्कृष्ट क्षमा भाव होता है और उनकेअंदर आत्मभावना रहती है।


म सा ने तपस्या करने वाले साधु पर बताया तपस्या मे क्रौध नही होना चाहिए बदले की भावना नही हो नही तो मरकर बदला लेने वाला क्रौधी देवता बनने मे देर नही लगेगी। मरते दम तक अगर आलोचना नही करी तो वह अगले भव तक चलेगा।जो तकलीफ देता वह ही हमारा कर्म कटाता है।


म सा ने कहा कभी कभी क्रौध हमे सिखाने के लिए भी होता है जो कर्मो को काटने का माध्यम बन जाता है, क्रौध सहन करना सिखाता है सहना सहना कब तक सहना जब तक जीवन तब तक सहना। धैर्य सहनशीलता ऐसी चीज हे इसका समय नही होता।
इससे पहले श्री प्रखर श्रीजी म सा ने कहा हमारे जीवन की गाडी रेल के दो पटरियों के समान होती पहला श्रुत धर्म दुसरा चरित्र धर्म हमे सोचना है कोनसी गाडी लोकल या शताब्दी का टिकट लेना है जो जल्दी मोक्ष ले जा सके।ऐकाग्रता से सुनना अराधना करनी चाहिए।
भगवान की वाणी तेतीस गुणो की धनी होती है, वह द्रव्य क्षेत्र काल भाव देखकर अपनी देशना देते थै, किसी प्रकार का संशय नही रहता, सामान्य श्रोता भी समझ जाते है। उनकी वाणी मे चापलूसी गुप्त बात नही होती।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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