जग्गी हत्याकांड : हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दी एक दिन की मोहलत, अमित ने रायपुर लोवर कोर्ट से ली जमानत

जग्गी हत्याकांड : हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दी एक दिन की मोहलत, अमित ने रायपुर लोवर कोर्ट से ली जमानत

बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 1 अप्रैल । छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में आज बिलासपुर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी। डिवीजन बेंच में मामले की अंतिम सुनवाई होगी, जिसमें CBI, राज्य सरकार, सतीश जग्गी और अमित जोगी अपना पक्ष रखेंगे।

अमित जोगी इस मामले के मुख्य आरोपी रहे हैं। हाईकोर्ट में फाइनल सुनवाई से पहले अमित जोगी ने रायपुर लोवर कोर्ट से 50-50 हजार बांड पर जमानत ले ली है।

दरअसल, डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई हो सके। हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपी थी।

तब सीबीआई ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे।

4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे।

अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था।

रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया।

हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया था। उन्होंने बताया था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी।

जब CBI की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा, इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता।

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