राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 9 अप्रैल । श्री पार्श्वनाथ जैन बगीचा में आयोजित सामूहिक नवकार जाप के अवसर पर जिलाधीश जितेंद्र यादव ने जैन धर्म की प्राचीनता और इसके सिद्धांतों की सराहना करते हुए समाज को संबोधित किया।
उन्होंने जैन धर्म को मानवीय मूल्यों का आधार बताते हुए कहा कि यह विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत को न केवल सिखाता है, बल्कि आत्मसात भी करता है।
ऋषि-मुनियों की तपस्या और गौरवशाली परंपरा
अपने संबोधन में कलेक्टर यादव ने कहा कि जैन धर्म की परंपरा हजारों साल पुरानी है और इसके ऋषि-मुनियों ने कठोर तपस्या से इस संस्कृति को जीवित रखा है। उन्होंने जैन संतों की महिमा का वर्णन करते हुए भावुक अंदाज में कहा:
”जैन मुनि और संत जिसे देख लें, उसका उद्धार हो जाता है (वह तर जाता है)। उनके चरण जिस पत्थर पर भी पड़ जाएं, वह पत्थर भी पूजनीय हो जाता है। ऐसी दिव्य और त्यागपूर्ण जीवनशैली केवल इसी धर्म में संभव है।”
युवा पीढ़ी के लिए विशेष संदेश
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव को देखते हुए उन्होंने नई पीढ़ी को एक महत्वपूर्ण सीख दी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आधुनिकता की दौड़ में अपनी जीवन वैल्यू (Life Values) और सिद्धांतों को कभी न छोड़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिद्धांत ही व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं और समाज को सही दिशा दिखाते हैं।
मुख्य बातें:
अहिंसा का मार्ग: ‘जियो और जीने दो’ का वैश्विक संदेश।
अटूट आस्था: जैन संतों की दृष्टि और चरणों की पावनता का उल्लेख।
संस्कारों का महत्व: युवाओं को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान।
इस अवसर पर सकल जैन समाज के पदाधिकारी और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। जिलाधीश के इन प्रेरक विचारों ने समाज के युवाओं और वरिष्ठों के बीच एक नई ऊर्जा का संचार किया।

