विशेष अदालत का आदेश रद्द : हाईकोर्ट बोला- नकली नोट केस की सुनवाई NIA कोर्ट ही करेगी

विशेष अदालत का आदेश रद्द : हाईकोर्ट बोला- नकली नोट केस की सुनवाई NIA कोर्ट ही करेगी

बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 20 जुलाई। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा है, नकली नोटों से जुड़े अपराधों की सुनवाई केवल इसलिए सामान्य सत्र न्यायालय में नहीं भेजी जा सकती क्योंकि अपराध वर्ष 2019 के एनआइए अधिनियम से पहले हुआ था।

कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 489-ए से 489-ई पहले से ही एनआइए अधिनियम, 2008 की अनुसूची में शामिल थी। 2019 के संशोधन से केवल नई धाराएं जोड़ी गई और क्रमांकन बदला गया, अधिकार क्षेत्र नहीं।

उत्तर छत्तीसगढ़ सूरजपुर जिले में वर्ष 2017 में नकली नोट बनाने और रखने के आरोप में आईपीसी की धारा 489-ए एवं 489-सी के तहत अपराध दर्ज किया गया था। प्रारंभ में मामला सूरजपुर की अदालत में चला, जहां आरोप तय हुए और 9 गवाहों के बयान दर्ज हुए। बाद में मामला एनआइए विशेष न्यायालय, बिलासपुर स्थानांतरित हुआ, जहां दोबारा आरोप तय कर दो गवाहों के बयान लिए गए।

इसके बाद राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार मामला एनआइए विशेष न्यायालय, अंबिकापुर भेजा गया, जहां तीन और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। हालांकि, अंबिकापुर की विशेष अदालत ने 15 अक्टूबर 2025 को यह कहते हुए सुनवाई से इंकार कर दिया कि अपराध 2019 के संशोधन से पहले का है, इसलिए उसके पास अधिकार क्षेत्र नहीं है और मामला वापस सूरजपुर भेज दिया।

हाई कोर्ट ने एनआइए अधिनियम, 2008 की मूल अनुसूची और 2019 संशोधन का परीक्षण करते हुए कहा कि आईपीसी की धारा 489-ए से 489-ई पहले से ही अनुसूचित अपराध थी। अदालत ने कहा कि 2019 के संशोधन से इन धाराओं को पहली बार शामिल नहीं किया गया, बल्कि केवल अन्य अपराध जोड़ने के कारण उनका क्रम बदला गया। इसलिए विशेष अदालत का यह निष्कर्ष कि संशोधन से पहले के मामलों की सुनवाई उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती, पूरी तरह गलत है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अंबिकापुर स्थित विशेष एनआइए कोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए कहा कि सूरजपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को एनआइए अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय अधिसूचित नहीं किया गया है। इसलिए इस मामले की सुनवाई केवल विशेष न्यायालय (एनआइए), अंबिकापुर ही करेगा।

कोर्ट ने सूरजपुर सत्र न्यायालय को, प्रकरण से संबंधित पूरा रिकार्ड एनआइए कोर्ट, अंबिकापुर को भेजने का निर्देश दिया है। ट्रायल उसी चरण से आगे बढ़ाया जाएगा, जिस स्थिति में 15 अक्टूबर 2025 के आदेश से पहले था।

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