संत समागम से जीवन मे परिवर्तन आता है – श्री विनय मुनि जी

संत समागम से जीवन मे परिवर्तन आता है – श्री विनय मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 21 जुलाई।
आचार्य रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म सा ने आज सुबह समता भवन मे अमृत देशना फरमाते हुए षभजन से कहा प्रभु वीर ने संदेश सुनाया जिनवाणी का ठाट लगाया, सभी जीवो को मार्ग बताया कर्मो से उनको छुडाया, भगवान महावीर की अपनी अमूल्य देशना से कई राजा महाराजा सेठो ने वास्तविक जीवन को समझकर अपनी आत्मा को स्वतंत्र बनाने के लिए साधना का कठिन मार्ग अपनाते गये, अपने मन को मजबूत रखते हुऐ आध्यात्मिक प्रयोगशाला मे आत्मा को रखते गये।


म सा ने कहा जीवन मे परिवर्तन आया वह संत समागम से मिला जो मन को खिला देता है, इसी प्रकार परदेशी राजा ने संतसंग की तरफ कदम बढाते हुए उनकी आज्ञा मे चलते गये अपने मन को खिलाते गये, संत समागम से शांति समाधि मिलती है, सौभाग्यशाली व्यक्ति ही चरित्र आत्मा की जिनवाणी सुन सकता है और जीवन मे बदलाव लाता है। चार परिषद क्षत्रिय ब्राह्मन वैश्य ऋषि का अपमान करने पर अलग अलग दंड का प्रावधान बताया गया।


म सा ने कहा साधुसंतो की कभी असातना नही करे उनकी विनय भाव से भक्ति करें, अंदर के विचार चेहरे पर आये बिना नही रह सकते, जितना पूछेंगे उतना ज्ञान मिलेगा, जितना विपरीत व्यवहार करेगे परिस्थिति उतनी मजबूत होगी, ज्ञान, दर्शन चरित्र मे निर्मलता आती जायेगी,सभी जीवो के प्रति संबध रखना होगा,भजन से कहा उठो नर नारियो जागो जगाने संत आये है, यह चातुर्मास अपनी चेतना को जगाने के लिए उपदेश मिलता है।


म सा ने व्यवहारिकता पर कहा व्यक्ति को अपने व्यवहार मे कुशलता सिखनी होगी व्यवहार मे लूखा पन नही हो,धार्मिकता के साथ व्यवहारिकता होनी चाहिए,जोडने की कला सिखनी चाहिए, दान देना तो किर्ती पूर्वक देवें, व्यवहारिकता का पाठ पढना चाहिए।एक आचार्य का नेतृत्व संघ मे एक सिंघाडा नही पहुंचा तो तुरंत दुसरा सिंघाडा पंहुच जाता जैसे शासन दीपक श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने नोखा से तुरंत ब्यावर पहुंच गये नो दिन में।
इससे पहले श्री विज्ञमुनि जी म सा ने आज धन्ना अंगार का चरित्र पर बताया केसे दीक्षा के भाव जगे भगवान महावीर की एक देशना से सयंम लेने को तैयार हो गये भजन से बताया सयमं मत लीजो मुझे छोडकर, साधु को जैसा स्थान मिले वैसा रहना चाहिए उसी मे अनुकूलता होती है।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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