रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 25 जुलाई । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत शनिवार, 25 जुलाई को प्रथम दादा गुरुदेव आचार्य जिनदत्त सूरीजी का स्वर्गारोहण महोत्सव श्रद्धा और धार्मिक वातावरण के बीच मनाया गया। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
पूज्य प्रवचन प्रभाविका साध्वी मंजुला श्रीजी महाराज साहिबा आदि ठाणा की पावन निश्रा में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8ः45 बजे प्रवचन मंडप में गुणानुवाद सभा से हुई। सभा में दादा गुरुदेव आचार्य जिनदत्त सूरीजी के जीवन, धर्म साधना और उनके द्वारा दिए गए आध्यात्मिक संदेशों का स्मरण किया गया।
इसके बाद सुबह 10ः36 बजे दादाबाड़ी परिसर में दादा गुरुदेव की पूजा संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन और आराधना कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। धार्मिक अनुष्ठान के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरुप्रसादी का लाभ लिया।
साध्वी मंजुला श्रीजी ने किया प्रथम दादा गुरुदेव का स्मरण
इस अवसर पर प्रथम दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरीजी का स्मरण करते हुए साध्वी मंजुला श्रीजी ने कहा कि करीब 872 वर्ष पूर्व एक महान व्यक्तित्व का स्वर्गारोहण हुआ था। प्रथम दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरीजी श्रमण संस्कृति के प्रमुख स्तंभ थे और उन्होंने अपने समय में समाज में महत्वपूर्ण धार्मिक एवं वैचारिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने कहा कि जन्म और स्वर्गारोहण दिवस उन्हीं महापुरुषों के स्मरण में विशेष बनते हैं, जिन्होंने समाज को दिशा और प्रेरणा दी हो। दादा गुरुदेव ने व्यक्ति को केवल स्वयं तक सीमित रहने के बजाय समाज और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी का भाव अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कामना की कि गुरु का यह संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
बच्चों के करियर के साथ चरित्र निर्माण पर भी दें ध्यान
साध्वी मंजुला श्रीजी ने अभिभावकों को बच्चों में धार्मिक और नैतिक संस्कार विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता विवाह, समारोह और अन्य सामाजिक आयोजनों में अपने बच्चों को साथ लेकर जाते हैं, लेकिन कई बार धर्मस्थल जाते समय उन्हें साथ नहीं ले जाते।
उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों के करियर को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन उनके चरित्र निर्माण पर भी उतना ही ध्यान देना आवश्यक है। यदि बचपन से ही अच्छे संस्कारों का बीजारोपण किया जाए तो बच्चों के व्यक्तित्व और आचरण की मजबूत नींव तैयार होती है।

स्नात्र महोत्सव के माध्यम से बच्चों ने जहां धार्मिक परंपराओं को करीब से जाना, वहीं आयोजन ने नई पीढ़ी को जिन शासन, धर्म और संस्कारों से जोड़ने का संदेश भी दिया।
यह आयोजन आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के तहत आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा रहा। चातुर्मास के दौरान प्रवचन, पूजा, आराधना सहित विभिन्न आध्यात्मिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम में श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, चातुर्मास समिति अध्यक्ष बसंत लोढ़ा सहित समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
रायपुर में रचेगा इतिहास: संस्कार सुरभि पाठशाला के बच्चे करेंगे भव्य स्नात्र महा महोत्सव, वार्षिक उत्सव में होगा पुरस्कार वितरण
दादाबाड़ी प्रांगण में 26 जुलाई 2026, रविवार को संभव संस्कार सुरभि ज्ञान वल्लभ पाठशाला के बच्चों द्वारा ऐतिहासिक स्नात्र महा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक संस्कारों से जुड़े इस विशेष आयोजन में पाठशाला के बच्चे कंठस्थ पंक्तियों के साथ भव्य स्नात्र पूजन करेंगे। आयोजकों ने समाजजनों से सपरिवार शामिल होकर बच्चों का उत्साह और मनोबल बढ़ाने का आह्वान किया है।
“जब नन्हे सुरों में गूंजेगी जिनवाणी, तो सजीव हो उठेगी प्रभु की उपस्थिति” के भाव के साथ आयोजित महोत्सव की शुरुआत सुबह 8 बजे भव्य स्नात्र पूजन से होगी। पाठशाला के बच्चे धार्मिक विधि-विधान और मुखाग्र पंक्तियों के माध्यम से जिन शासन की प्रभावना में सहभागी बनेंगे। आयोजन को नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार और जिनवाणी से जोड़ने की दिशा में विशेष पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

जैन परंपरा के अनुसार परमात्मा के जन्म के अवसर पर इंद्र द्वारा मेरू शिखर पर परमात्मा का अभिषेक किया जाता है। इसी धार्मिक प्रसंग को स्नात्र महोत्सव के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
आयोजकों ने समाज के लोगों से सपरिवार दादाबाड़ी पहुंचकर इस भक्ति आयोजन में सहभागी बनने और जिन शासन का परचम लहरा रहे बच्चों का मनोबल बढ़ाने की अपील की है।
सुबह 11 बजे वार्षिक उत्सव और पुरस्कार वितरण
स्नात्र पूजन के बाद सुबह 11 बजे से धार्मिक पाठशाला के बच्चों का वार्षिक उत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होगा। इसमें पाठशाला के बच्चों को उनकी उपलब्धियों और सहभागिता के लिए सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम के पश्चात साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन भी रखा गया है। आयोजन का उद्देश्य बच्चों में धार्मिक संस्कार, शिक्षा, धर्म और सेवा की भावना को मजबूत करना तथा नई पीढ़ी को जैन धर्म की परंपराओं और मूल्यों से जोड़ना है।
ज्ञान वल्लभ पाठशाला के माध्यम से श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट द्वारा रायपुर के करीब 10 स्थानों पर बच्चों को धार्मिक शिक्षा और संस्कारों से जोड़ने के लिए नियमित कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इन कक्षाओं का उद्देश्य नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और जीवन मूल्यों से परिचित कराना है।
26 जुलाई को एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में होने वाले इस आयोजन के लिए समाजजनों से कहा गया है कि वे परिवार के साथ पहुंचकर बच्चों की इस भक्ति यात्रा के साक्षी बनें और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामना करें।

