चातुमार्स मे अपना सुरक्षा क्वच मजबूत बनावें – श्री विनय मुनि जी

चातुमार्स मे अपना सुरक्षा क्वच मजबूत बनावें – श्री विनय मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 25 जुलाई।
आचार्य रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म सा ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन मे अमृत देशना प्रवचन मे फरमाते हुए कहा हम महावीर के अनुयायी है जिनवाणी सुनने के लिए काम धंधा छोडने को तैयार नही क्यो प्रेरणा करनी पडती है इसलिए संघ समाज को नयी दिशा नही दे पाते।स्वाध्याय चेतना जगाने को आते है चातुर्मास मे अपना सुरक्षा क्वच मजबूत बनावे।
म सा ने कहा आज ज्ञान का तो बौध बढ रहा पर साथ ही विनम्रता का अभाव होता जा रहा।समय ओर संत समागम का महत्व समझे नही तो पृकति को समझाने मे देर नही लगेगी।हमारे अंदर दर्शन का लगाव होना चाहिए, महापुरुषों से क्षमा याचना करनी चाहिए।
म सा ने परदेशी राजा का चरित्र पर कहा परदेशी राजा धर्म को आत्मा को नही मानता था वह रोज मारो काटो जेल मे यातना दो यह नियम बना रखा था इसलिए उसके मंत्री ने धर्म की समझ लाने के लिए उनको के सी श्रमण के पास सपरिवार सूर्योदय के साथ दर्शन हेतु भेजा और सयमं ले लिया के सी श्रमण ने धर्माचार्य का महत्व बताया।
इससे पहले भजन से बताया ओ महावीर स्वामी बना दो मुझे ज्ञानी पिला दो अमृत वाणी बन जांऊ वीतराग मे हम अनादिकाल से प्रतिदिन जिनवाणी से आत्मजागरण का संदेश मिल रहा है पर हमारी चेतना नही जग पा रही,क्योकि इस संसार मे पांचो इन्द्रियों से भटकते जा रहे इस कारण जीवन का वास्तविक स्वरूप समझ नही पाये।
म सा ने कहा हमारी जिस दिन थकान मिट जायेगी तभी हमारी चेतना अंगराई लेगी तभी वीरता का संस्कार प्राप्त होगा और हमारा जीवन प्रिय बन जायेगा। वीरता लाने के लिए प्रभु महावीर के सिद्धांत को समझना होगा।आज शारीरिक रोग से ज्यादा मानसिक रोग हो रहा इसलिए देश मे मनोचिकित्सक ज्यादा होते जा रहे हैं।
म सा ने आगम का मतलब बताया आगम जो गम को भुला देता है,भगवान महावीर का सुरक्षा क्वच सम्यक ज्ञान दर्शन चरित्र से मजबूत रहा जो अनाडी क्षेत्र मे जाकर तपस्या करने लगे लोगों ने न जाने कितने उपसर्ग दिये फिर भी कुछ बिगाड़ नही पाये, ज्ञान दर्शन चरित्र मोक्ष का रास्ता हैं। हमारी श्रृद्धा मेरुपर्वत की जैसी होनी चाहिए।
इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने कहा दीक्षा चार प्रकार की होती हे वह दीक्षा किसी को विकास की और ले जाती तो किसी को विनाश की और ले जाती है, आत्मविश्वास साधना को मजबूत करता तभी हम आत्म शक्ति को पहचान पायेंगे। सबसे बडा घातक आत्मविश्वास होता है, वही हमे आगे बढाने मे सहायक बनता हैंं।
म सा ने कहा नकारात्मक भाव दुख का कारण होता है, हमारे अंदर शेर छिपा है उसे क्षमा के माध्यम से बाहर निकालना होगा। भजन से बताया सहना सहना कब तक सहना जब तक जीवन तब तक सहना,चातुर्मास महापुरुषों के गुणो को ग्रहण करने के लिए आता है।हमारा एक मात्र लक्ष्य मुक्ति का होना चाहिए।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

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