रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 25 जुलाई। छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में विवेकानंद सभागार, कृषि महाविद्यालय रायपुर में एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘गौ-आधारित जैविक कृषि प्रशिक्षण एवं प्रेम की खेती’ था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) सुरेश कुमार चंद्रवंशी और मुख्य वक्ता कृषि वैज्ञानिक एवं जीव-जंतु कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य अजीत केलकर थे।
‘गाय एक अनुसंधान’ पुस्तक की प्रति की भेंट
कार्यक्रम के दौरान मनोहर गौशाला के ट्रस्टी डॉ. अखिल जैन ने अतिथियों, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और प्रशासनिक अधिकारियों को ‘गाय एक अनुसंधान’ पुस्तक भेंट की। इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. विवेक त्रिपाठी, सह-अनुसंधान निदेशक डॉ. धनंजय शर्मा, जैविक कृषि विशेषज्ञ डॉ. सुनील अग्रवाल, कृषि वैज्ञानिक मनमंथ शर्मा सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और कृषक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
जैविक और सतत कृषि पर बल
मुख्य वक्ता अजीत केलकर ने गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, वर्मी कंपोस्ट, पंचगव्य, गौमूत्र अर्क, गोपालन और जैव विविधता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “स्वयं का बीज, स्वयं की खाद, स्वयं की दवाई, स्वयं का अनाज और स्वयं का बाजार’ का संकल्प ही भारतीय कृषि और किसानों को आत्मनिर्भर बना सकता है।
कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि जैविक और सतत कृषि पद्धतियों से भूमि की उर्वरता बढ़ती है और लागत में कमी आती है। कार्यक्रम के अंत में खैरागढ़ क्षेत्र में गौ-आधारित कृषि एवं अनुसंधान के कार्यों की सराहना करते हुए इसे प्रदेशभर में प्रोत्साहित करने की बात कही गई।

