रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 26 जुलाई । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत रायपुर के दादाबाड़ी में भव्य स्नात्र पूजा महोत्सव का आयोजन किया गया। परम पूज्य संवेगरत्न सागरजी म.सा. एवं परम पूज्य मंजुला श्रीजी म.सा. की पावन निश्रा में आयोजित महोत्सव में ज्ञानवल्लभ पाठशाला के छात्र-छात्राओं ने इंद्र और इंद्राणी का रूप धारण कर संगीतमय प्रस्तुति के साथ परमात्मा के जन्मोत्सव और अभिषेक की धार्मिक परंपरा को जीवंत किया।

महोत्सव में करीब 200 बच्चों ने इंद्र-इंद्राणी के रूप में सहभागिता करते हुए श्रद्धा और उत्साह के साथ स्नात्र पूजा की। जैन परंपरा के अनुसार परमात्मा के जन्म के अवसर पर इंद्र द्वारा मेरू शिखर पर परमात्मा का अभिषेक किया जाता है। इसी धार्मिक प्रसंग को बच्चों ने स्नात्र महोत्सव के माध्यम से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में प्रकाशचंद गोलछा, अरुण गोलछा, गौतमचंद लोढ़ा, निर्मल गोलछा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास
ज्ञानवल्लभ पाठशाला के माध्यम से श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट द्वारा रायपुर के करीब 10 स्थानों पर बच्चों के लिए नियमित धार्मिक कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इन कक्षाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को जैन धर्म, संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
स्नात्र पूजा महोत्सव भी इसी उद्देश्य की एक कड़ी रहा, जिसमें बच्चों ने धार्मिक अनुष्ठान को केवल देखा ही नहीं, बल्कि स्वयं सहभागी बनकर उसकी परंपरा और आध्यात्मिक भाव को समझा।
कार्यक्रम में श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, चातुर्मास समिति अध्यक्ष बसंत लोढ़ा सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

27 जुलाई को निपुणा श्रीजी माता का 54वां दीक्षा दिवस
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के तहत धार्मिक आयोजनों का क्रम आगे भी जारी रहेगा। कैवल्यधाम तीर्थ प्रेमिका तथा छत्तीसगढ़ के करीब 40 स्थानों पर मंदिर और दादाबाड़ी निर्माण की प्रेरणादात्री परम पूज्य निपुणा श्रीजी माता के 54वें दीक्षा दिवस के अवसर पर 27 जुलाई को दादाबाड़ी में सामूहिक धार्मिक आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम सुबह 8:45 बजे परम पूज्य मंजुला श्रीजी म.सा. की निश्रा में आयोजित होगा। इस दौरान सामायिक सहित विभिन्न धार्मिक गतिविधियां होंगी। सामायिक के माध्यम से आत्मचिंतन, पापों के प्रायश्चित, स्वाध्याय, कर्मों की निर्जरा तथा जीवन में मैत्री और करुणा के भाव को विकसित करने का संदेश दिया जाएगा।

