सम्यक दृष्टि भाव का जागरण करे सांत्विक विचार अपनावे, अज्ञान मोह का चश्मा उतारे गुरु समागम करें – श्री विनय मुनि जी

सम्यक दृष्टि भाव का जागरण करे सांत्विक विचार अपनावे, अज्ञान मोह का चश्मा उतारे गुरु समागम करें – श्री विनय मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 27 जुलाई।
आचार्य रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म सा ने खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना प्रवचन हुक्मसंघ के नवे नश्रत्र आचार्य भगवन व बहुश्रुत वाचनाचार्य को वंदन नमन करते हुए कहा आज के प्रवचन का सार सम्यक दृष्टि भाव का जागरण करे।अज्ञान मोह का चश्मा उतारे गुरु का समागम करें।


म सा ने भजन से कहा महावीर प्रभु जी चरणा मे वंदन हो,कृपा रखाओ शासन रा स्वामी.. केवली धर्म मे शक्ति होगी तो तत्वो का ज्ञान होगा, सम्यक दृष्टि भाव बनेगा तभी जीवन का वास्तविक स्वरुप को समझ पायेंगे। मनुष्य जन्म दुर्लभ है क्योंकि यह जीवन ऐसा है जो हमे स्वर्ग ले जा सकता व सातवी नरक मे भी ले जा सकता साथ मे मोक्ष का द्बार भी खोल सकता।


म सा ने कहा जिंदगी एक मौका है इसके स्वर्ग नरक दो द्बार है जिंदगी हमे चार गति का अंत करना व सत्य का बौध करना सिखाती है।सम्यक दर्शन का प्रकाश भीतर के अंधकार को दूर करता है।स्वर्ग नरक अपने ऊपर है सांत्विक विचार तस्वर्ग व तामसिक विचार नरक का अनुभव कराता है। सात्विक विचार चेहरे पर आ जाता तामसिक दिल दिमाग़ पर असर डालता हैं।


म सा ने परदेशी राजा का चरित्र चल रहा हे उन पर कहा वह श्रमणोपासक बन गया धर्म के प्रति श्रद्धावान हो गये भटकना छोड समय शक्ति समझ आ गयी दुरूपयोग करना छोड कर धर्म से जुड गये,भजन से कहा भटके हुए इंसान प्रभु शरण चले आना हो जाए जीवन सफल गबराये क्यो दिवाना।

महारानी ने परदेशी राजा पर उनकी महारानी सूर्यकांता ने शस्त्र अग्नि मंत्र का अपने बेटे सूर्यकांत को राजा बनाने के लिए इनका प्रयोग करने लगी।


म सा ने कहा मन का लुखापन हटाए स्वार्थ को हटाए, मन मौका महिला मार्केट से बचना है यह अणुबंम हाइडोजन बंम बना सकते है,गरिबो की हाय लेना कभी फलेगा नही, पाप की जड पाताल अस्तपताल तक होती है जो साक्षात नरक के समान है। जिस व्यक्ति को संघ समाज परिवार से लेना देना नही उनकी जिंदगी नरक जैसी होती हैं।


इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने कहा सयंम मार्ग लोहे के चने चबाना जैसा होता है साधु जीवन कठानाईयो से भरा रहता है फिर भी आज व्यक्ति सयंम लेने को तैयार रहते है,साधना के पथ पर चलने वाले घर परिवार छोड देते और अपना हित मानकर सयंम लेते है।


म सा ने कहा जिस दिन व्यक्ति की पुण्यवाणी खत्म होगी उसी दिन पाप का उदय हो जायेगा।
अनेक महापुरुष कठिनाइयों को सहते हुए बने, जिनशासन को सुनना आसान बात नही सुनने की शक्ति होनी चाहिए जो नही सुन सकता उसकी गिरावट जायेगी।


संचावन विजय औस्तवाल ने करते हुए कहा आज की धर्म सभा मे रायपुर छतीसगढ़ से श्रीसंघ उपस्थित रहे।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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