जब भी हो गुरुदेव के दर्शन समझो तीर्थ हो गया- श्री विनय मुनि जी

जब भी हो गुरुदेव के दर्शन समझो तीर्थ हो गया- श्री विनय मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 28 जुलाई।
आचार्य रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म सा ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना प्रवचन हुक्मसंघ के नश्रत्र आचार्य भगवन व बहुश्रुत वाचनाचार्य को वंदन नमन करते हुए भजन से बताया जब भी हो गुरुदेव के दर्शन समझो तीर्थ हो गया.. आज की जिनवाणी से गुरु भक्ति का भ्रमण कर रहे है,भक्ति से श्रद्धा की नींव पैदा होती है तभी जीवन मे आनंद आयेगा भक्ति को जायकेदाय बनाने मे किंतु परंतु नही होना चाहिए।


म सा ने कहा आज इंटरनेट का युग है विदेशो से बैठे चहरा देखकर बात कर लेते फिर भी शांति नही मिलती हमारा चहरा उदास रहता है,शांति लानी है तो जिनवाणी का लाभ लेना पडेगा धर्म भीतर मे आने पर अंधकार से प्रकाश आ जायेगा। सही दिशा मिल जायेगी जिससे आनंद होगा।सम्यक मार्ग पर पृवती करना।


म सा ने परदेशी राजा का चरित्र पर कहा कैसै उसने धर्म के मार्ग पर चलकर श्रमणोपासक बन गये किसी पर भी ध्यान नही दिया बस धर्म मे लगे रहे निस्वार्थ संतसमागम मे पंहुच गये,अपना अमूल्य जीवन परिवर्तन कर लिया। ऐक सूत्र जीवन मे उतार लिया अपना लिया मे ना जानू कोन पराया।भगवान महावीर भी यही कहते सुखी जीवन जीना है तो मे ना जानू कोन पराया।


म सा ने कहा परदेशी राजा की महारानी ने षड़यंत्र रचकर चारो आहार मे जहर देने की सोच ली क्योकि वह बेले की तपस्या करते हुए पारणा करने लगे उनके तेरवे पारणे पर जहर दे दिया ओर असर होते ही वह पौषधशाला पंहुच गये पलेवन करके सारे व्रतो को ग्रहण करके संथारा ले लिया जहर भी हमारा भी परदेशी राजा पी गया।


म सा ने भजन से बताया जर जर हो गयी काया चेतन्यता ने मचाया शोर महावीर मुक्ति मेरी करवा तन हो गया कमजोर,फिर भी नही मरे तो महारानी ने उनका सिर गोद मे रख कर गला दबा कर मार दिया।


म सा ने कहा व्यक्ति को जलेसी ईष्या बदले की भावना मानसिक पदुषर्ण होता है। सहयोग का विचार स्वर्ग मे उतारता है, धन इकट्ठा करने मे खुश मत हो विसर्जन करना सीखो। पाप छुपता नही अंतर आत्मा देखती है।पाप का किया लोभ विघटन कराता है,डरना भी क्या कष्टो से महापुरूषो का किनारा है,विपदाओ के माध्यम से कर्मो का किनारा है।यह स्वार्थ भरी दुनिया है लोगो ने नाटक समझ लिया।


इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने कहा इस संसार मे ऐसा कोई महापुरुष नही मिला जो नरक मे सुख दे सके, आज हमारी दिनचर्या कुए के मेढक के समान हो गयी उसी मे रहने लगे बाहर नही निकल पा रहे है। कठिन परिस्थिति मे चेहरा खुश रखना चाहिए।सुख दुख दुसरे लोगो से मिलता है, आज साधु का आधा जीवन तो लोगो को खुश करने मे निकल जाता है।


म सा ने कहा सच्चा भक्त गुरु के एक इसारे पर चला जाता है, धर्म दिल से होना चाहिए, हमारी बुद्धि आज पैसे मे लगी है धर्म को समझने मे नही, हर परिस्थिति मे धर्म शांति देता है पर लोग समझ नही पाते, उदारता व्यक्ति के पास लोग डोरे डोरे चले आते है। ब्यावर के लोगो की पुण्यवाणी है जो हर घंटे कोई ना कोई साधु संतो के दर्शन हो जाते है।पत्नीयो का कर्तव्य है पति को धर्म के रास्ते पर लगाने मे कसर नही रखे।


संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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