बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 29 जुलाई । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत सचिव भर्ती मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल मेरिट सूची में नाम आने से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। अदालत ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर देता है, तो मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग नहीं कर सकता।
मामला सूरजपुर जिले के रामानुजनगर निवासी देवेन्द्र कुमारी साहू से जुड़ा है। जिला पंचायत सूरजपुर ने वर्ष 2018 में ग्राम पंचायत सचिव के 11 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। चयन प्रक्रिया में देवेन्द्र कुमारी का नाम अन्य पिछड़ा वर्ग (महिला) श्रेणी की मेरिट सूची में शामिल था, लेकिन सात वर्ष से अधिक समय तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंचायत निदेशक से भर्ती प्रक्रिया लंबित रहने का कारण पूछा। जवाब में राज्य शासन ने बताया कि भर्ती का विज्ञापन जारी करने से पहले वित्त विभाग और राज्य शासन की आवश्यक स्वीकृति नहीं ली गई थी। इस कारण भर्ती प्रक्रिया नियमों के विपरीत और अधिकार क्षेत्र से बाहर मानी गई।
इसके बाद पंचायत निदेशालय के निर्देश पर जिला पंचायत सूरजपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 22 अक्टूबर 2025 को पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद मेरिट सूची के आधार पर नियुक्ति का दावा नहीं किया जा सकता और याचिका को निरस्त कर दिया।

