अकलतरा(अमर छत्तीसगढ़) 2 अगस्त। – जैन समाज द्वारा चातुर्मास मंगल कलश स्थापना के पावन अवसर पर नगर के जैन मंदिर से निर्यापक श्रवण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महाराज, मुनिश्रा 108 शीतल सागर महाराज, मध्य प्रदेश के अशोकनगर से पधारे बाल ब्रह्मचारी देश के सुप्रसिद्ध प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के मंगल सानिध्य में गाजे बाजे के स्स्थ नगर में भव्य एवं आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई, धर्म, भक्ति और उत्साह से परिपूर्ण इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में समाज के महिला, पुरुष, युवा एवं बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में सहभागिता कर जिनेन्द्र भगवान के जयघोष से पूरे नगर को भक्तिमय बना दिया।

शोभायात्रा बजरंग चौक, शास्त्री चौक, सब्जी मार्केट रोड भगवान परशुराम चौक होते हुए कार्यक्रम स्थल जानकीलाल लिखमानिया धर्मशाला परिसर में पहुंची, महिलाओं द्वारा अपने सिर पर मंगल कलश धारण करने के साथ झांकी, भक्ति गीतों की मधुर स्वर लहरियाँ तथा अनुशासित धार्मिक वातावरण ने शोभायात्रा को अत्यंत भव्य एवं आकर्षक स्वरूप प्रदान किया,

चातुर्मास मंगल कलश स्थापना के अवसर पर निर्यापक श्रवण मुनिश्री 108 प्रसाद सागर महाराज ने कहा कि जैन समाज अकलतरा को धार्मिक कार्यों के लिए पूरे भारतवर्ष में जाना जाता है धर्म नगरी के नाम से विख्यात अकलतरा में लोगों के महान पुण्य के संचय से चातुर्मास का मंगल अवसर नगर को प्राप्त हो रहा है,
चातुर्मास केवल वर्षा ऋतु में एक स्थान पर निवास करने की परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तप, स्वाध्याय और धर्म साधना का श्रेष्ठ अवसर है, चातुर्मास के दौरान धर्म आराधना, पूजा, स्वाध्याय, दान एवं सदाचार का पालन करने से जीवन में आध्यात्मिक उन्नति होती है।
मंगल कलश स्थापना शुभता, समृद्धि, शांति और धर्म के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है तथा यह समाज में संस्कार, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश देता है, मुनिश्री 108 शीतल सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में आधुनिक जीवनशैली पर प्रकाश डालते हुए सौंदर्य प्रसाधनों के उपयोग में विशेष सावधानी बरतने का संदेश दिया,

उन्होंने कहा कि आज बाजार में उपलब्ध अनेक प्रसाधनों में ऐसे रासायनिक तत्व एवं जीव हिंसा से जुड़े पदार्थ भी हो सकते हैं, जिनका प्रयोग स्वास्थ्य के साथ-साथ अहिंसा के सिद्धांतों की दृष्टि से भी उचित नहीं है, उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी सौंदर्य प्रसाधन का उपयोग करने से पूर्व उसकी गुणवत्ता, शुद्धता एवं निर्माण प्रक्रिया की जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए तथा यथासंभव प्राकृतिक एवं अहिंसा के सिद्धांतों के अनुरूप उत्पादों का ही उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने संयमित एवं सादगीपूर्ण जीवनशैली को ही वास्तविक सौंदर्य का आधार बताते हुए कहा कि बाहरी सजावट से अधिक आवश्यक मन, वचन और कर्म की पवित्रता है,
धर्मसभा के दौरान मुनिराजों ने श्रद्धालुओं को संयम, सदाचार, आत्मचिंतन एवं धार्मिक संस्कारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी, उन्होंने कहा कि चातुर्मास का प्रत्येक दिन आत्मकल्याण का अमूल्य अवसर है,
जिसका सदुपयोग धर्म आराधना, सेवा और आत्मानुशासन के माध्यम से किया जाना चाहिए, चातुर्मास के प्रथम मंगल कलश स्थापित करने का सौभाग्य देवेंद्र जैन, सुमन लता जैन, अंशुल जैन, क्षिपा जैन परिवार बिलासपुर को प्राप्त हुआ, द्वितीय मंगल कलश स्थापित करने का सौभाग्य राजेंद्र जैन, स्वप्निल जैन, रितेश जैन, वंदना जैन, रीत जैन परिवार एवं तृतीय मंगल कलश स्थापित करने का सौभाग्य मंगलचंद जैन पवन कुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम मे जैन समाज बिलासपुर, कोरबा, नैला, बलोदाबाज़ार, बलोदा, भाटापारा, तिल्दा, पेंड्रा, रायपुर, दुर्ग, डोंगरगांव, जबलपुर नागपुर भोपाल एवं देशभर के जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

