बंधन से शिखर तक पहुंचने का मार्ग है मनन, चिंतन और मंथन : साध्वी मंजुलाश्रीजी

बंधन से शिखर तक पहुंचने का मार्ग है मनन, चिंतन और मंथन : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 2 सितंबर । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने बुधवार को जीवन में बनने वाले संबंधों और कर्मबंधनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में मनन, चिंतन और मंथन करते रहना चाहिए। यही प्रक्रिया उसे बंधनों से ऊपर उठाकर आत्मकल्याण के शिखर की ओर ले जाती है।

साध्वीश्री ने कहा कि व्यक्ति जीवनभर बहुत संघर्ष करता है, लेकिन हर संघर्ष के बदले उसे सम्मान या अपेक्षित परिणाम मिले, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में ‘ऋणानुबंध’ को समझना जरूरी है। जीवन में मिलने वाले कई संबंध और परिस्थितियां हमारे पूर्व कर्मों से जुड़े होते हैं। इस भाव को समझ लेने से व्यक्ति की शिकायत, क्रोध और कषाय धीरे-धीरे कम होने लगती है।

उन्होंने कहा कि पति-पत्नी, मां-बेटे, पिता-पुत्र सहित संसार के सभी रिश्ते किसी न किसी ऋणानुबंध से जुड़े हैं। लेकिन जब इन रिश्तों में अपेक्षा और अधिकार के स्थान पर मैत्री भाव आ जाता है, तो संबंधों में सहजता आती है और आत्मकल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

साध्वीश्री ने कहा कि ‘ऋणानुबंध’ की समझ कषायों के बीच एक बड़ा हथियार है। यह एक ऐसा भाव है, जिसे जीवन में समझ लिया जाए तो व्यक्ति अनेक परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार कर सकता है। सामने वाले के व्यवहार को लेकर क्रोध या द्वेष करने के बजाय कर्मों के संबंध को समझना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संसार कठिन है और मोक्ष सरल है। कठिनाई संसार में नहीं, बल्कि संसार के प्रति हमारे मोह में है। जैसे-जैसे व्यक्ति मोह को धीरे-धीरे कम करता जाएगा, वैसे-वैसे वह मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ता जाएगा। मनन, चिंतन, मंथन और मैत्री भाव के साथ जीवन जीना आत्मा को बंधन से शिखर की ओर ले जाने का मार्ग है।

इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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