‎कर्मशील व्यक्ति हर परिस्थिति  में अपने‎आपको ढाल लेता है – समयप्रभ जी

‎कर्मशील व्यक्ति हर परिस्थिति  में अपने‎आपको ढाल लेता है – समयप्रभ जी


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‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 22 अक्टूबर । ” कर्मशील व्यक्ति हर परिस्थिति में अपने आपको ढाल लेता है। समूह कार्य क्षमता बढ़ाती है। परिवार एवं समूह में समर्पण का भाव होना चाहिए तभी वह टिके रह सकते हैं और उनकी कार्यक्षमता में विस्तार होता है। ” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य समयप्रभ सागर जी  ने  व्यक्त किए।


‎              मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री समयप्रभ सागर जी ने फरमाया कि एकांत महत्वपूर्ण है। साधु की साधना भी एकांत में ही होती है। एकांत में रहना आसान नहीं है। साधु एकांत में रहकर सोचते हैं कि हम अपने आप में तथा समाज में कैसे जागृति ला सकें। मुनिश्री ने कहा कि हम दुनिया के लिए इतना सोचते हैं, इतना कार्य करते हैं तो फिर अपनी आत्मा के लिए क्यों नहीं कर सकते। हम भी परमात्मा के प्रति समर्पित हैं।


‎ मुनि श्री समयप्रभ जी ने कहा कि हमें अपनी आस्था के प्रति, धर्म के प्रति समर्पण का भाव रखना चाहिए। साधु समर्पण का प्रतीक है। मूल जितना मजबूत होगा साधना भी उतनी मजबूत होगी। हमें साधना तत्व को समझ कर आगे बढ़ना होगा। साधक दुख से नहीं घबराते और ना ही विपत्ति से घबराते हैं ।

वे उनका डटकर सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ते जाते हैं। वयक्ति के लिए वचन भी महत्वपूर्ण होता है। मीठे बोल स्फूर्ति देते हैं। अपने बोल मधुर रखिए और साधना पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहिए।

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