पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की आराधना शुरू, पहले दिन सामूहिक दया तप, उमड़े श्रावक-श्राविकाएं…. मरने के आंनद का नाम ही संथारा है, आत्मा का कल्याण हो जाता है…. मृत्यु को बना लो उत्सव, ऐसा स्वागत करो कि हमेशा के लिए उससे पीछा छूट जाए-समकितमुनिजी
हैदराबाद(अमर छत्तीसगढ)1 सितम्बर। जीवन में वास्तव में मृत्यु उस अतिथि के समान है जिसके आगमन का कोई भरोसा नहीं होता…










