सहजता,सरलता व समरसता की प्रतिमूर्ति आचार्य आनंदऋषिजी- हरीशमुनिजी…. जीवन में सबको आनंद देने वाले बन गए आनंद गुरू- हितेशमुनिजी…. जिसे आनंद बाबा जैसे गुरू मिल जाते है उनका जीवन संवर जाता है-सचिनमुनिजी

सहजता,सरलता व समरसता की प्रतिमूर्ति आचार्य आनंदऋषिजी- हरीशमुनिजी…. जीवन में सबको आनंद देने वाले बन गए आनंद गुरू- हितेशमुनिजी…. जिसे आनंद बाबा जैसे गुरू मिल जाते है उनका जीवन संवर जाता है-सचिनमुनिजी

पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ़), 24 जुलाई। श्रमण संघीय द्वितीय पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य श्री आंनदऋषिजी म.सा. की 126वीं जयंति के उपलक्ष्य में श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,बिबवेवाड़ी पूना के तत्वावधान में रसिकलाल एम.धारीवाल स्थानक भवन में पांच दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन गुरूवार को पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा के सानिध्य में सामायिक दिवस मनाते हुए 2-2 सामायिक करने के साथ ॐ आनंद जाप किया गया।

जाप के माध्यम से पूज्य आनंद बाबा का स्मरण करते हुए सर्व सुख शांति एवं मंगलमय जीवन की कामना की गई। इस दौरान आनंद गुरू के प्रति आस्था से ओतप्रोत श्रद्धावान श्रावक-श्राविका उमड़े।

धर्मसभा में सेवारत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. ने कहा कि सहजता,सरलता व समरसता की प्रतिमूर्ति आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. का पूरा जीवन संघ समाज व मानवता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने हमेशा समाज की एकता मजबूत करने के लिए कार्य किया। उनकी यश व सेवा गाथा महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा व भक्ति भावों से सुमिरन की जाती है।

उन्होंने महाराष्ट्र हो या राजस्थान या देश का कोई भी क्षेत्र जहां भी चातुर्मास किए वहां जिनशासन की प्रभावना करने के साथ आमजन को धर्म का मर्म समझाने के साथ सत्य व अहिंसा से परिपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। ऐसे महान संत का जीवन हमेशा हमारे लिए प्रेरणादायी रहेगा।

प्रज्ञा रत्न श्री हितेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि आनंद गुरू सबको आनंद देने वाले बन गए। संघनायक व आचार्य आनंद गुरू जैसे उन महापुरूषों को उनके गुणों के कारण दुनिया जाने के बाद भी याद करती है, उनके गुणों का जितना गुणगान करे कम होगा।

मुनिश्री ने कहा कि पूज्य आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. के जीवन में कठोरता व कोमलता दोनों शामिल थे। जहां कठोर होने की जरूरत होती वहां कठोरता बरतते ओर जहां कोमलता दिखाने की जरूरत होती वहां वैसा भाव भी प्रदर्शित करते थे।

प्रार्थनार्थी सचिनमुनिजी म.सा. ने कहा कि जिनके जीवन में आनंद बाबा जैसे गुरू मिल जाते है उन शिष्यों व भक्तों का जीवन भी संवर जाता है। गुरू ही होता है जो अपने शिष्य को सुयोग्य बनाता है ओर संसार सागर से पार करने का मार्ग दिखाता है। गुरू के बिना हमारा जीवन अधूरा ही रहेगा।

आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. ने मानव सेवा व जीव दया के लिए सदा प्रेरणा प्रदान की। उनकी प्रेरणा ने लाखों लोगों के लिए मार्गदर्शन का कार्य किया ओर लोग धर्म से जुड़ने के लिए प्रेरित हुए। धर्मसभा में युवारत्न श्री नानेशमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

कई श्रावक-श्राविकाओं ने लिए सात-सात उपवास के प्रत्याख्यान

पूज्य संतप्रवर की प्रेरणा से चातुर्मास में श्रावक-श्राविकाओं द्वारा त्याग करने की होड़ लगी है। सुश्रावक आकाश रविन्द्र लुकड़, संजय धनराज घटाघट, महावीरचंद घटाघट,प्रकाशचन्द नाहर, प्रशांत प्रकाशचंद नाहर, सुश्राविका खुशी आकाशजी लुकड़, श्वेता चतर, पुष्पा मांगीलाल बोरा ने 7-7 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। तपस्वी श्रावक-श्राविकाओं का श्रीसंघ द्वारा जयकारों के साथ अनुमोदना की गई।

पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा., हरीशमुनिजी म.सा. ने तपस्वियों के प्रति मंगल भावना व्यक्त की। कई श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास, एकासन,आयम्बिल, उपवास आदि तप के प्रत्याख्यान भी लिए।

श्रावक-श्राविकाओं ने की श्री गुरू गौतम एकासन अनुष्ठान आराधना

युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा. आदि ठाणा 5 के सानिध्य में बिबवेवाड़ी श्रीसंघ के तत्वावधान में गुरूवार को श्री गुरू गौतम एकासन अनुष्ठान का आयोजन किया गया।

चातुर्मास के इस तीसरे अनुष्ठान में सैकड़ो श्रावक-श्राविकाओं ने एकासन तप कर लाभ लिया। जाप एवं स्वाध्याय के साथ एकासन अनुष्ठान सम्पूर्ण विधि प्रज्ञारत्न श्री हितेशमुनिजी म.सा. ने सम्पन्न कराई।

चातुर्मास के दौरान प्रत्येक साधक द्वारा 14 गुरूवार को एकासन का लक्ष्य रखा गया है। अनुष्ठान के बाद दोपहर 2.30 से 3.30 बजे तक श्राविकाओं के लिए धार्मिक ज्ञान कक्षा एवं प्रश्नमंच का आयोजन किया गया।

इस दौरान लोकमान्य संत वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के जीवन से जुड़े प्रश्न शामिल थे। अगले गुरूवार को होने वाले प्रश्नमंच में गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. के जीवन से जुड़े प्रश्न शामिल रहेंगे। चातुर्मास में नियमित प्रवचन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक हो रहे है।

श्रीसंघ सम्पर्क सूत्र-
श्री पोपटलालजी ओस्तवाल, अध्यक्ष
मो. 9823081825
श्री माणिकचंदजी दुग्गड़, उपाध्यक्ष
मो. 9890940941
श्री गणेशलाल ओसवाल,महामंत्री
मो. 9921879613

श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,बिबवेवाड़ी पूना

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