रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 14 अगस्त। आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत गुरुवार को दादाबाड़ी में आयोजित प्रवचन में परम पूज्य हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने कहा कि यदि निंदा करनी ही है, तो अपने भीतर बैठे शत्रुओं—क्रोध, मान, माया और लोभ—की करो, धर्म की नहीं। यह चारों कषायें आत्मा को नीचे गिराने का काम करती हैं, जबकि धर्म आत्मा को ऊपर उठाता है।
जिसने कषायों की प्रशंसा की, वह पतन की ओर गया; और जिसने धर्म का सहारा लिया, उसने मोक्ष की ओर कदम बढ़ाए। इसलिए निंदा का लक्ष्य धर्म नहीं, बल्कि अपने दोष होने चाहिए।

कभी भी किसी के कहे शब्दों में आकर धर्म से दूर मत होइए। लोग कहेंगे—”तुम तो पापी हो, तुम्हें धर्म नहीं करना चाहिए।” लेकिन धर्म का द्वार किसी के लिए बंद नहीं है। जो आज पाप में डूबा है, वह भी कल धर्म में लीन हो सकता है। धर्म करने के लिए पवित्र होना ज़रूरी नहीं, लेकिन धर्म करने से पवित्र होना निश्चित है।
मंदिर ज़रूर जाइए, चाहे थोड़े समय के लिए ही सही। वहाँ की शांति, भक्ति का वातावरण, और भगवान के दर्शन मन को निर्मल करते हैं। कभी-कभी किसी संत की एक वाणी या किसी भक्त का एक वाक्य जीवन बदल देता है। धर्म का एक क्षण भी पाप की जंजीरों को तोड़ सकता है।

सोचिए, एक व्यापारी के पास दो दुकानें हैं—एक में मुनाफ़ा हो रहा है, दूसरी में घाटा। क्या वह घाटे वाली दुकान को बंद कर देगा? नहीं! वह मुनाफ़े वाली दुकान के लाभ से घाटे वाली को भी सुधारने का प्रयास करेगा। जीवन में धर्म वह मुनाफ़ा है, जिससे पाप के घाटे की भरपाई होती है।
पाप पूरी तरह से न भी छूटे, तो भी धर्म मत छोड़ो। पूजा न सही, तो दिन में एक बार भक्ति करो। रोज़ न हो सके, तो पर्व-त्योहार के दिन तो अवश्य धर्म करो। पर्व-त्योहार सिर्फ उत्सव नहीं, आत्मा को चमकाने का अवसर हैं।

याद रखो—धर्म का एक छोटा-सा दीपक भी पाप के अंधकार को मिटा सकता है। इसलिए धर्म को मत छोड़ो, पाप अपने आप घटेंगे। धर्म को पकड़े रहो, क्योंकि यही तुम्हारा असली सहारा है।
श्री गिरनार तप पारणा उत्सव और मेहंदी सांझी का दिव्य संगम
जैन संस्कृति और भक्ति की गूंज से गूंजने वाली धर्मनगरी रायपुर एक बार फिर पावन अवसर की साक्षी बनने जा रही है। श्री जिनकुशलसूरी दादाबाड़ी के पावन धाम पर 16 और 17 अगस्त 2025 को श्री गिरनार तप के पारणा उत्सव का भव्य आयोजन होगा। परम पूज्य साध्वी श्री हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में यह आयोजन तप, भक्ति और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहेगा।

मेहंदी सांझी और मंगल गीत – 16 अगस्त 2025
तप की मधुरता और संस्कृति की सुगंध को एक साथ महसूस कराने के लिए 16 अगस्त, शनिवार को दोपहर 2 बजे से श्री जिनकुशलसूरी भवन में “मेहंदी सांझी” और “मंगल गीत” का आयोजन होगा। गीत-संगीत और पारंपरिक रंगोलियों से सजे इस कार्यक्रम के पश्चात हाई टी की भी व्यवस्था रहेगी। इस अवसर पर श्रीमती नीलिमा जी निमाणी एवं उनकी टीम अपनी मनमोहक प्रस्तुति से सभी को आनंदित करेंगी।

तपस्या अनुमोदनार्थ कार्यक्रम – 16 अगस्त 2025
सुबह 9:00 बजे – प्रवचन का आयोजन, जिसमें धर्म और तप का महत्व प्रतिपादित किया जाएगा।
दोपहर 2:00 बजे – मेहंदी सांझी एवं मंगल गीत का सांस्कृतिक संगम।
रात्रि 8:30 बजे – प्रभुभक्ति से ओतप्रोत “जय जय गरवो गिरनार” का संगीतमय आयोजन।
पारणा उत्सव– 17 अगस्त 2025
रविवार, 17 अगस्त को सुबह 9:00 बजे तपस्वियों का भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित होगा। यह क्षण, तप की विजय और आत्मशुद्धि का प्रतीक होगा। इसके पश्चात 11:45 बजे साधर्मिक वात्सल्य के माध्यम से सभी उपस्थित जन आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करेंगे।

विशेष आकर्षण और धार्मिक महत्व
इस अवसर पर मुंबई के सुप्रसिद्ध संगीतकारों द्वारा दर्शनार्थ गिरनारजी और नाकोड़ा जी के भक्ति भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी, जो वातावरण को भक्ति रस से भर देगी। तप अभिनंदन उत्सव के मुख्य सूत्रधार डॉ. विपिन बागरेचा, नागदा (मप्र) होंगे।
लाभार्थी और स्मृति
यह आयोजन नीमाला (माया) धर्मपत्नी मितल झाबक के मानसक्षेत्र तप की पूर्णाहुति एवं स्व. श्रीमती तेजुबाई सोनारराज जी की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है।
साथ ही जीवनचंद, जैनल, महेंद्र, पारस, निनाल, निवान, विवाना झाबक परिवार, भाटागांव रायपुर तथा मितल पीयूषजी कोचर परिवार के विशेष सहयोग से यह कार्यक्रम भव्य रूप ले रहा है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली तथा आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने जानकारी दी कि दादाबाड़ी में प्रतिदिन सुबह 8:45 से 9:45 बजे तक साध्वीजी के प्रवचन का आयोजन भी हो रहा है। समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर जिनवाणी का लाभ लें।

