राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 2 अगस्त । डोंगरगढ़–कटघोरा नई रेल लाइन परियोजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा जिस प्रकार आज श्रेय लेने की होड़ मचाई जा रही है, वह जनता को भ्रमित करने का एक असफल प्रयास है। सच्चाई यह है कि यह परियोजना वर्ष 2018 में तत्कालीन सांसद अभिषेक सिंह के कार्यकाल में स्वीकृत हुई थी तथा उसका विधिवत शिलान्यास भी किया जा चुका था।
प्रदेश कांग्रेस मीडिया पैनलिस्ट अभिमन्यु उदय मिश्रा ने कहा कि भाजपा के ही नेताओं और पदाधिकारियों के हालिया बयानों तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित वक्तव्यों से यह स्पष्ट हो जाता है कि वे स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि वर्ष 2018 में तत्कालीन सांसद अभिषेक सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल के प्रयासों से इस परियोजना को स्वीकृति मिली थी। ऐसे में आज वर्तमान सांसद द्वारा उसी परियोजना को दोबारा स्वीकृत कराने का श्रेय लेना जनता के साथ छल और राजनीतिक दिखावा है।
उन्होंने कहा कि यदि यह परियोजना पहले से स्वीकृत थी, शिलान्यास हो चुका था और इसकी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तो भाजपा यह बताए कि पिछले आठ वर्षों में इस परियोजना को धरातल पर उतारने में इतनी देरी क्यों हुई? आखिर किसकी सरकार थी और किसकी जिम्मेदारी थी?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस विकास कार्यों का कभी विरोध नहीं करती, बल्कि हर जनहितकारी परियोजना का स्वागत करती है। किंतु इतिहास को तोड़-मरोड़कर जनता के सामने परोसना और पहले से स्वीकृत परियोजना को अपनी नई उपलब्धि बताना राजनीतिक ईमानदारी के खिलाफ है।

