ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 2 अगस्त।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा. ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए कहा हुक्मसंघ के उदयवान नक्षत्र आचार्य भगवन और बहुश्रुत वाचनाचार्य को वंदन नमन करते हुए भजन की पंक्तियो से बताया कर लो धर्म समझो मरम् कटे, थाडा कर्म बार बार समझाये कब समझ मे आवेला, म सा ने मानवता पर कहा समाजिकता मे सबसे पहले मानवता का गुण होना चाहिए।
म सा ने कहा मानव जीवन इसलिए महत्वपूर्ण है हमारे अंदर मानवीय गुण आना चाहिए तभी जिने का आनंद ले सकेंगे क्योकिं तीर्थंकर ही मानव बन सकता है उनके अंदर मे मानवीय गुण विकसित हो जाते हैं इसलिए जीवन जीने का आनंद ले लिया हमे भी हमारे अंदर मानवीय गुण प्रकट करना चाहिए जिससे महामानव के गुण आ जाये और इन गुणो को देवता भी नमस्कार करने के लिए आ जाते है।
म सा ने बताया महामानव के अंदर सहानुभूति, सहयोग का गुण होते है व सेवा करने का गुण होता है, बिना सहयोग के जिंदगी चल नही सकती हमे एक दुसरे का सहयोग लेना ही पडेगा एक हाथ आंख कान नही होने पर दसरे हाथ आंख का सहयोग होगा ही होगा, दुसरे के भीतर सहानुभूति की भावन होनी चाहिए, भगवान महावीर कहते है सहिनुभूति अपनाओगे तो मानवता का गुण विकसित होता जायेगा।
म सा ने भजन से गरीबो की सुनो वो तुम्हारी सुनेगा तुम एक पैसा दोगे वो दस लाख देगा, इन पंक्तियो से हमे सहयोग करना सहानुभूति रखने की प्रेरणा लेनी है वह दस लाख नही आशिर्वाद होता है इसलिए भीखारी को भगवान के रूप मे देखते है, म.सा ने बताया भारतीय संस्कृति मातृ देवा भवः पीतृदेवा भवः और अथिति देवो भवः की जानी जाती है। अपरिचित व्यक्ति के साथ मधुर व्यवहार करना मानवता का गुण है।
म.सा ने अंत मे उदयवीर की कथा सुनो नर नारी पदमावती पुत्र बने सहकारी पर कहा महारानी पदमावती की वेदना कम नही होने से वह ध्वल राजा से धर्म की शरण मे जाने का आशीर्वाद मांग रही है ओर राजा गरीब असहाय दिन दुखियो की सेवा करते हुऐ दान करते गये।
इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने ज्ञान के मार्ग पर कहा ज्ञान दर्शन चरित्र तप प्रभु का मार्ग है इसका पुरुषार्थ करना ही प्रभु का मार्ग होता है, यह मार्ग मोक्ष पहुंचा देता है जैसा पुरुषार्थ वैसा मार्ग, छोटे छोटे रोगो का रोना नही सहना सीखे, जितना सहना उतना रहना,ज्ञानी व्यक्ति हमारे जैसा होते है।ज्ञान मे तर्क विर्तक नही होना चाहिए अज्ञानी ही करता तर्क विर्तक करता है।
म सा ने बताया जिने जिने मे फर्क होता है कोई सरलता मे जीता तो कोई छल कपट करके जीता है, ज्ञानी गणो को देखता अज्ञानी बाहर को देखता है, पुदगलो के नजारे हम को इतना रुलाता है कर्मो का बंध करवा देता है, आज जैन समाज की क्या स्थिति हो रही गुटका तंबाकू छुट नही पा रहे है, म सा ने जो घर मे टिकेगा वो सयंम मे टिकेगा,हमे अपने बच्चों को धर्म की शिक्षा देकर सयंम मार्ग पर चलने की प्रेरणा देवें।
संचालन अध्यक्ष गोतमचंद चौधरी ने करते हुए कहा काफी जनो के तपस्या चल रही है उनकी संघ परिवार अनुमोदना करते है,आज दस छ पांच तेला उपवास आदि के प्रत्याखान कराये गये,आज की धर्म सभा मे धमदा से वीर माता पिता उपस्थित है, आज की प्रभावना वीर परिवार ज्ञान चंद सुशील कुमार बांठिया की तरफ से रखी गयी।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

