अंबिकापुर में 2.70 करोड़ फर्नीचर खरीदी घोटाला : ACB ने 10 स्कूलों के तत्कालीन प्रधान पाठकों को तलब कर पेश होने के दिए निर्देश

अंबिकापुर में 2.70 करोड़ फर्नीचर खरीदी घोटाला : ACB ने 10 स्कूलों के तत्कालीन प्रधान पाठकों को तलब कर पेश होने के दिए निर्देश

अंबिकापुर(अमर छत्तीसगढ़) 2 अगस्त । सरगुजा संभाग के बहुचर्चित 2.70 करोड़ रुपये के स्कूल फर्नीचर खरीद घोटाले की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अंबिकापुर ने मामले की जांच तेज करते हुए सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के 10 माध्यमिक विद्यालयों के तत्कालीन प्रधान पाठकों को मूल दस्तावेजों सहित तलब किया है।

एसीबी के उप पुलिस अधीक्षक द्वारा 1 अगस्त 2026 को जारी पत्र में विकासखंड शिक्षा अधिकारी, ओड़गी को निर्देश दिया गया है कि संबंधित सभी तत्कालीन प्रधान पाठकों को 4 अगस्त 2026 को मूल रिकॉर्ड के साथ एसीबी कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित कराया जाए।

जानकारी के अनुसार, राजीव गांधी शिक्षा मिशन (सर्व शिक्षा अभियान) के तहत वर्ष 2010-11 में माध्यमिक विद्यालयों के लिए फर्नीचर खरीदी हेतु 2.70 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। तत्कालीन जिला कार्यालय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, सरगुजा द्वारा विभिन्न स्कूलों में स्टूडेंट डेस्क और बेंच की आपूर्ति के लिए एक निजी फर्म को कार्यादेश जारी किया गया था।

एसीबी की जांच में कई विद्यालयों में फर्नीचर की वास्तविक आपूर्ति को लेकर गंभीर संदेह सामने आया है। जांच एजेंसी अब यह सत्यापित कर रही है कि जिन स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध कराने का रिकॉर्ड दर्ज है, वहां वास्तव में सामग्री पहुंची थी या नहीं। इसी के तहत संबंधित विद्यालयों से मूल स्टॉक रजिस्टर, फर्नीचर प्राप्ति रसीद, संबंधित फर्म द्वारा जारी दस्तावेज तथा कार्यालयीन सील सहित मूल अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच के दायरे में ओड़गी विकासखंड के बेगारीडांड, पचरौटेला, सहपुर, कुबेरपुर, परसियाखुर्द, नवाटोला, धरसड़ी, टोंगा, देवनगरा और बिहारपुर के माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। यह जांच अपराध क्रमांक 28/2017 के तहत की जा रही है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(2) तथा धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित प्रावधानों के तहत जांच जारी है।

एसीबी ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड के साथ निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों के सत्यापन के बाद यह स्पष्ट होगा कि फर्नीचर की आपूर्ति वास्तव में हुई थी या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो तत्कालीन अधिकारियों, संबंधित फर्म और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है।

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