राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 2 फरवरी/ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अनु.जाति जनजाति, पिछड़े वर्गो के विरूद्ध किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो, जातिगत अपमान न हो, इस आधार पर 13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पुराने नियमों में परिवर्तन करते हुए नये नियमों को लागू किया है ।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों में और महाविद्यालयों में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत आधारित भेदभाव को रोकना है ताकि इक्विटी समानता और समावेश के आधार पर भेदभाव मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जा सके ।
इस नये प्रावधान में उच्च शिक्षण संस्थाओं में जाति, धर्म, लिंग, आशा, क्षेत्र और शिक्षण संस्थाओं में समता आधरित नियमों को लागू कर संविधान की मूल भावना को जनमानस तक पहुंचना है ताकि उच्च शिक्षण संस्थाओं मे जाति आधारित भेदभाव पूर्णत: बंद हो ।

ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लासेस फेडरेशन वर्तमान यू.जी.सी. कानून का समर्थन करता है, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) अमरकंटक में कार्यरत् प्रो. विकास सिंह (कम्प्यूटर सांइस) के विरूद्ध गंभीर, आपराधिक, शैक्षणिक, वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की समेकित (शिकायत लंबित मामलों की गहन जांच, पुलिस सत्यापन एवं दंडात्मक कार्यवाई हेतु पुलिस महानिरीक्षण रायपुर छ.ग. को प्रमाण सहित ज्ञापन सौपा गया है,
यह अत्यंत जनहित से जुडा मुद्दा है, इस लिए फेडरेशन आपका ध्यान आकर्षण कराना चाहता है कि, उपरोक्त प्राध्यापक जो इंदिरा गांधी आदिवासी जनजाति विषय विश्वविद्यालय में कार्यरत् है उसके विरूद्ध भी भिलाई नगर थाना में अनेक स्थानों पर अपराधिक प्रकरण पंजीबंद्ध हैl
जिसने अपने अपराधिक रिकार्ड की जानकारी न देकर भारत सरकार के साथ विश्वासघात किया है जब कि उपरोक्त अपराधिक प्रकरण के अपराधिक व्यक्ति का चयन केन्द्रीय विश्वविद्यालय में नही किया जाना चाहिए था ।
वर्तमान में विश्वविद्यालय में प्रो. विकास सिंह द्वारा जातिगत भेदभाव शैक्षणिक और वित्तीय अनियमितता, प्रशासनिक और नैतिक कदाचार के अरोप परिलक्षित होते है, ज्ञापन सौपने वालों में डॉ. आर.पी. साहू, राष्ट्रीय महामंत्री ए.आई.बी.सी.एफ., एन.के. साहू, राजेश कुमार, सुरज देवांगन, अति मौर्य, जमुना देवी, मीरा साहू आदि शामिल थी ।
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